सौ साल पुरानी एक रिकाॅर्डिंग के कुछ अनसुलझे तार | एडिसन और ताॅल्सताॅय

INFORMATIVE BLOG

11/27/2023

हम सौ साल पुरानी बात कर रहे हैं जब दो अभूतपूर्व ऐतिहासिक हस्तियों ने एक

कारनामे को अंजाम दिया। इनमें एक थे मशहूर अमरीकी खोजकर्ता और दूसरे थे महान रूसी लेखक। हमारे लिए इन दो महान हस्तियों ने एक ऐसी धरोहर छोड़ी है जिसे हम

आज बौद्धिक संपदा कह सकते हैं। ये अलग बात है कि इस मामले में कई गुत्थियाँ भी हैं जिन्हें हल किया जाना है।

हम बात कर रहे हैं, थाॅमस एल्वा एडिसन और लेव ताॅल्सताॅय की।

एडिसन ने अपनी जिन खोजों को पेटेंट कराया उनमें एक लोकप्रिय खोज थी-फोनोग्राफ की।

उन्होंने ये खोज 1878 में पेटेंट करवाई थी। ध्यान रहे कि खुद एडिसन जन्म से ही ऊँचा सुनते थे। फोनोग्राफ एक ऐसी मशीन थी जिससे ध्वनि फिर से सुनी जा सकती थी।

ये एक वैक्स सिलिण्डर्स पर ध्वनि को मुद्रित करने का कारनामा था। 1895 में पहली बार ताॅलस्ताॅय ने एक फोनोग्राफ रिकाॅर्ड बनाने की कोशिश की थी। वो एक एथ्रोग्राफर ब्लाॅक से मिलने गए थे जिसने अमरीका से हाल में ही इन मशीनों का एक पूरा जखीरा मंगवाया था। उसने ताॅल्सताॅय की कहानी द रिपेंटट सिनर, इन मशीनों पर रिकाॅर्ड की।

Tolstoy and Edison
Tolstoy and Edison

कई साल बाद मई 1907 में न्यूयाॅर्क टाइम्स के संपादक स्टीफेन बोंसाल, ताॅल्सताॅय से मिलने उनके यास्नाया पोल्याना एस्टेट पहुँचे। वहाँ उनकी शानदार आवभगत की गई, जिससे खुश होकर उन्होंने ताॅल्सताॅय से वादा किया कि वे ताॅल्सताॅय के लिए एक नई फोनोग्राफ मशीन भेजेंगे। अमरीका में पत्राकार इन मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे थे।

वादे के मुताबिक एक नई फोनोग्राफ मशीन जनवरी 1908 में रूस पहुँच गई। बोन्साल ने इसे पहुँचाने की जिम्मेदारी न्यूयाॅर्क ईवनिंग जर्नल के पत्रकार और अपने दोस्त आर्थक ब्रिस्बेन को दी। वो एडिसन की कम्पनी एडिसन बिजनेस फोनोग्राफ पहुँचे। जब एडिसन को पता चला कि फोनोग्राफ किसे भेजा जाना है तो उन्होंने पैसे लेने से इन्कार कर दिया और खुद अपनी मशीन पर ये शब्द खुदवाकर यास्नाया पोल्याना भेज दी ‘‘काउंट लेव को थामस एल्वा एडिसन की और से सप्रेम भेंट।’’

यास्नाया पोल्याना के संग्रहालय में वह फोनोग्राफ आज भी देखा जा सकता है। 1908 की गर्मियों में एडिसन ने ताॅल्सताॅय से गुजारिश की कि वे उनके लिए

अंग्रेजी और फ्रेंच में अपनी आवाज में कुछ रिकाॅर्ड करवा दें। एडिसन का मानना था कि ‘‘ताॅल्सताॅय जैसे लेखक की बात जमाना बड़े गौर से सुनता है और अमल में लाता है।" उन्होंने लिखा कि "मेरा फोनोग्राफ आज दुनिया के तकरीबन सभी देशों में पहुँच चुका है और अकेले अमरीका ही में 10 लाख से ज्यादा लोग इसे इस्तेमाल कर रहे हैं।’’

एडिसन ने आगे लिखा "आप तो दुनिया भर में जाने जाते हैं और आपकी लेखनी से प्रभावित लोग आपसे सुनी बातों का गर्मजोशी से स्वागत करेंगे क्योंकि उन्हें आपके शब्दों पर विश्वास है। फिर इस नए माध्यम में आपकी बातें और आपकी आवाज हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएगी।’’ ताॅल्सताॅय जल्द ही तैयार हो गए।

1908 की दिसम्बर में ताॅल्सताॅय के डाॅक्टर दुशान माकोवित्स्की ने अपनी डायरी में लिखा कि दो अंग्रेज एक बहुत अच्छा फोनोग्राफ लेकर पहुँचे और उन्होंने ताॅल्सताॅय की आवाज रिकाॅर्ड करके सुनाई।

डाॅक्टर दुशान की डायरियों से ही पता चलता है कि रिकाॅर्डिंग से पहले ताॅल्सताॅय ने खूब तैयारी की, खासकर अंग्रेजी बोलने का बहुत अभ्यास किया, और वो बहुत नर्वस भी थे। दुनिया भर के सुनने वालों से उन्हें क्या कहना है, यह सोचने में उन्होंने काफी समय लगाया।

ताॅल्सताॅय के साथी ब्लादिमिर चेरत्काॅव ने उन्हें सुझाया कि वो 1887 में लिखी अपनी Treatise of Life से एक अंश अंग्रेजी में पढ़ दें। डाॅ. दुशान लिखते हैं कि ताॅल्सताॅय ने चुने हुए अंश को रूसी और फ्रांसिसी में बस एक ही बार में रिकाॅर्ड करवा दिया लेकिन जब अंग्रेजी पढ़ने लगे तो दो-एक बार अटके और कहा कल करवाऊँगा।

रिकाॅर्डिंग बहुत शानदार हुई और एडिसन ने जब उसे सुना तो बहुत तारीफ की। एडिसन का तोहफा और ताॅल्सताॅय की जवाबी हार्दिकता ने प्रेस का ध्यान खींचा।

ये अलग बात है कि इतिहासकारों या पत्रकारों को इस प्रकरण में कुछ कड़ियाँ आपस में सम्बद्ध नहीं जान पड़तीं।

20, फरवरी 1908 को मशहूर अखबार ड्यूमा ने लिखा कि ताॅल्सताॅय ने अपनी आवाज में कुछ रिकाॅर्ड करवाया और उसमें भी जो अंग्रेजी उन्होंने फोनोग्राफ के सामने बोली उसमें बहुत आत्मविश्वास था।

यह जानना दिलचस्प होगा कि वो मशहूर सिलिंडर्स कहाँ गए ?

21 फरवरी के न्यूयाॅर्क टाइम्स में खबर छपी-‘‘ताॅल्सताॅय का एडिसन को तोहफा: ताॅल्सताॅय अपनी आवाज रिकार्ड करके भेजेंगे, एडिसन ने ताॅल्सताॅय को एक फोनोग्राफ भेंट किया।’’

ताॅल्सताॅय के अध्येताओं को भी उन सिलिंडर्स का कुछ अता-पता नहीं है। सच तो ये है कि उनका अस्तित्व भी आज सवालों के घेरे में है।

जनवरी 1909 में मास्को एक अखबार रूल ने बताया कि एडिसन का एक साउंड इंजीनियर ताॅल्सताॅय से मिलने पहुँचा और ‘‘ताॅल्सताॅय ने अपनी आवाज में चार टुकड़े रूसी, अंग्रेजी और जर्मन में रिकाॅर्ड करवाए। रिकाॅर्डिंग बहुत अच्छी हुई है और ये सिलिंडर्स रिलीज नहीं किए जाएँगे।’’

ताॅल्सताॅय की मौत के बाद 1914 में द न्यूयाॅर्क टाइम्स ने लिखा कि ताॅल्सताॅय का बेटा काउंट ताॅल्सताॅय एडिसन से मिलने पहुँचा और एडिसन उसे उस बारह नंबर के निशिद्ध कमरे भी ले गए जिसके बाहर हमेशा लिखा रहता था कि इस कमरे में किसी का भी आना मना है।

एडिसन की एक एल्बम है जिसमें उनके आविष्कार पर बड़े-बड़े लोगों ने अपने विचार लिखे हैं, इस एल्बम में ताॅल्सताॅय के विचार भी दर्ज हैं। उन्होंने लिखा ‘‘दुनिया की सर्वाधिक शक्तिशाली चीज विचार है। विचारों के प्रचार के जितने ज्यादा साधन होंगे, वे उतने ही प्रभावकारी होंगे। छापेखाने का आविष्कार मानव कल्याण के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। अब टेलिफोन और खासतौर पर फोनोग्राफ के आविष्कार से, जो न सिर्फ शब्दों को संरक्षित-प्रसारित करेगा बल्कि उसके माध्यम से हम बोलने वाली आवाज के रंग भी सुरिक्षत कर लेंगे- ये एक नए युग की शुरूआत है।

लेव ताॅल्सताॅय (हस्ताक्षर)।

लेकिन ताॅल्सताॅय की आवाज के उन सिलिंडर्स का क्या हुआ जो दुनिया भर में भेजे गए ?

ताॅल्सताॅय म्यूजियम का कहना है कि वो 1914 में एडिसन के दफ्तर में लगी आग में जल गए।

हालाँकि इतिहासकार और ऑडियो आर्काइविस्ट लेव शिलोव ने अपनी किताब द वाॅयसेज ऑफ़ राइटर्सः रेकॉर्ड्स ऑफ़ अ साउंड आर्काइविस्ट में लिखा है कि उनमें से एक रिकाॅर्डिंग अभी बची है। और इस बात की पुष्टि 80 के दशक के अन्त में अमरीकी लेखक बेल काॅफमान, न्यूयाॅर्क पब्लिक लाइब्रेरी के एक सदस्य एडवर्ड कैजीनेट्स और एडिसन म्यूजियम की क्यूरेटर मैरी बी. बाउलिंग ने की।

मास्को के स्टेट लिटरेरी म्यूजियम को लिखे एक पत्र में बी. बाॅउलिंग ने लिखा ‘‘बार-बार ये सवाल पूछा जाता है कि ताॅल्सताॅय की उन रिकाॅर्डिंग्स का क्या हुआ जो उन्होंने एडिसन को भेजी थीं। खासकर अंग्रेजी वाली। हमने अब तक की छानबीन में इससे जुड़े पत्राचार और दस्तावेज तो बरामद कर लिए हैं लेकिन सिलिंडर हम नहीं ढूँढ सके हैं। बहरहाल आपके इस पत्र के उत्तर में आपको बताते हुए हमें प्रसन्नता है कि अबकी एक बार फिर जब हमने कुछ अनमार्क्ड सिलिंडर्स की छानबीन की तो पता चला है कि एक सिलिंडर है जिसमें ताॅल्सताॅय की अंग्रेजी वाली रिकाॅर्डिग है।’’

थोड़े समय बाद बेल काॅफमान जब मास्को आईं तो उन्होंने लेव शिलोव को वो सिलिंडर दिखाया। बदकिस्मती से 2004 में शिलोव की मौत हो गई और सिलिंडर की प्रमाणिकता एक बार फिर संदिग्ध रह गई। उधर अमरीकी लोगों ने मामले को वहीं का वहीं छोड़ दिया।

ताॅल्सताॅय चाहते थे कि वो अपने संस्मरण रिकाॅर्ड कराएँ लेकिन जब उन्हें पता चला कि फोनग्राफ लगातार रिकाॅर्ड नहीं कर सकता और उसमें लगे वैक्स सिलिंडर्स को हर 10-12 मिनट पर बदलना पड़ता है, तो उन्होंने छोटे-छोटे टुकड़े कहानियाँ और चिट्ठियाँ रिकाॅर्ड करवाईं। इनमें लेखक की आवाज और अन्दाज के कई रंग हैं। इनमें से ज्यादातर सिलिंडर्स से सीडी बनाकर जारी किया जा चुका है और ये सिलिंडर्स ताॅल्सताॅय स्टेट म्यूजियम में सुरक्षित रखे गए हैं।

पहली मार्च 2008, द हिन्दू, में प्रकाशित एनेस्तासिया येलायेवा की रिपोर्ट पर आधारित।